अरावली पहाड़ियाँ भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक हैं, जो उत्तर भारत के पारिस्थितिक संतुलन में एक प्राकृतिक ढाल का काम करती हैं। हालिया न्यायिक हस्तक्षेप के कारण यह एक बार फिर चर्चा में हैं।
अरावली पर्वतमाला चर्चा में क्यों है?
अरावली पर्वतमाला हाल में इसलिए चर्चा में है क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने इसके संरक्षण और खनन गतिविधियों के लिए एक समान नीति स्तर की परिभाषा तय करने पर ज़ोर दिया है। न्यायालय ने इसे मरुस्थलीकरण के विरुद्ध प्राकृतिक अवरोध, भूजल रिचार्ज क्षेत्र और जैव विविधता का महत्वपूर्ण आवास माना है।
अरावली पर्वतमाला का महत्व:
अरावली पहाड़ियाँ मरुस्थलीकरण रोकने, जल पुनर्भरण और जैव विविधता संरक्षण में अहम भूमिका निभाती हैं। अनियंत्रित खनन को सुप्रीम कोर्ट ने पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा बताया है।
हालिया न्यायिक हस्तक्षेप का महत्व:
न्यायालय का हस्तक्षेप इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे अरावली की एक समान परिभाषा और विनियमन की दिशा में स्पष्टता आई है और राज्यों के बीच नियमों की असंगति दूर करने का प्रयास हुआ है।
राज्यों और केंद्र की साझा जिम्मेदारी:
केंद्र और राज्य सरकारों पर अब संरक्षण, खनन नियंत्रण और भूमि उपयोग को लेकर समन्वित और जिम्मेदार नीति अपनाने की साझा जिम्मेदारी है।
विकास बनाम संरक्षण की बहस:
अरावली को लेकर बहस विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन से जुड़ी है, जहाँ पारिस्थितिक सीमाओं का सम्मान आवश्यक है।
निष्कर्ष:
अरावली का संरक्षण और विकास के बीच संतुलन आवश्यक है। न्यायिक निर्देशों और नीति समन्वय के माध्यम से ही इस प्राचीन पर्वतमाला को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।
Author: NewsHint Editorial Desk
Source: Supreme Court observations & official records
