नक्सलवाद पर निर्णायक रणनीति: प्रभावित जिलों में ऐतिहासिक गिरावट
केंद्र सरकार की वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अपनाई गई एकीकृत और बहुआयामी रणनीति के चलते नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उल्लेखनीय कमी आई है। 2014 में जहाँ सबसे अधिक प्रभावित जिलों की संख्या 36 थी, वह 2025 में घटकर केवल 3 रह गई है, जबकि कुल नक्सल प्रभावित जिले 126 से सिमटकर 11 रह गए हैं। संवाद, सुरक्षा और समन्वय के स्पष्ट सिद्धांतों पर आधारित इस रणनीति के तहत सरकार ने मार्च 2026 तक सभी प्रभावित क्षेत्रों को नक्सल-मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
हिंसा से हाशिये तक: नक्सलवाद
नक्सलवाद की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी आंदोलन से हुई और यह धीरे-धीरे तथाकथित “लाल गलियारे” में फैल गया, जिससे कई राज्य प्रभावित हुए। माओवादी भले ही हाशिए पर पड़े जनजातीय समुदायों की रक्षा का दावा करते हों, लेकिन व्यवहार में उनका आधार हिंसा और जबरन वसूली रहा है। भारत की बहुआयामी उग्रवाद-विरोधी रणनीति ने हिंसा में उल्लेखनीय कमी लाई है, आंदोलन को कमजोर किया है और प्रभावित जिलों के पुनर्एकीकरण को संभव बनाया है।
नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई: 2025 के प्रमुख आधिकारिक आंकड़े
2014 में 126 नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 2025 में घटकर केवल 11 रह गई है, जबकि सबसे अधिक प्रभावित जिले 36 से घटकर मात्र 3 रह गए हैं, जो लाल गलियारे के लगभग खात्मे का संकेत देता है।
12,000 किमी से अधिक सड़कों, 586 किलेबंद पुलिस स्टेशनों, 361 नए सुरक्षा शिविरों, 8,500 से अधिक चालू मोबाइल टावरों और 92 करोड़ रुपये की संपत्ति की जब्ती ने माओवादियों के भौगोलिक व वित्तीय वर्चस्व को निर्णायक रूप से कमजोर किया है।
साल 2025 में ही 317 नक्सलियों को मार गिराया गया, 800 से अधिक गिरफ्तार किए गए और लगभग 2,000 ने आत्मसमर्पण किया, जिससे मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत की दिशा में तेज़ प्रगति हुई है।
— आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार (दिसंबर 2025)
निष्कर्ष:
वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ बहुआयामी रणनीति से प्रभावित क्षेत्रों, हिंसा और हताहतों में बड़ी कमी आई है, जिससे आंदोलन की क्षमता कमजोर हुई है। हालांकि कुछ सीमित इलाकों में चुनौती बनी हुई है, लेकिन निरंतर सतर्कता और विकासोन्मुख प्रयासों के साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और पुनर्एकीकरण की संभावनाएँ मजबूत हुई हैं।
Author: Editorial Desk, NewsHint.in
स्रोत: आधिकारिक सरकारी आंकड़े एवं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी
(As on:दिसंबर 2025)
